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Friday, July 1, 2016

मैं अभी जिंदा हूँ

ज़िंदगी की ठोकरों से
घबराई और सहमी-सी सुरत मेरी
देखकर माँ ने कहा डर मत
मै अभी जिंदा हूँ
काँपते हाथों से थपथपा कर मेरे गालों को
मुस्कराकर कहा न हार
मैं अभी जिंदा हूँ

हादसे भी गर्द बन उसकी दुआओं से हारी
न हुए दर्द में तन्हा जब जब मै उसे पुकारी
मेरे लिए लड़ती रही सबसे वो बार बार
फिक्र की बात नहीं कहती रही
मैं अभी ज़िदा हूँ|

मेरे किरदार पे धब्बा कभी लगने ना दिया
नसीहते इतनी दी कि खजाना अबतक है भरा
मेरी हर ख्वाहिश पे मिटती रही वो बार बार
और कहती रही घबरा मत
मै अभी जिंदा हूँ

हर मुसीबतों में हौसला हमेशा उसने बढ़ाया
वो चट्टान बन गई जब तुफान आया
उसकी पेशानी चमकती रही अँधेरो मे भी
और उस उजाले ने कहा कुछ सोच मत
मै अभी जिंदा हूँ

बैठकर चुनती रही  मेरे दामन से काँटे
हाथ लहुलुहान हुए हारी न बुढ़ी साँसे
छुपकर तन्हाई मे वो रोती रही बार बार
और हँसकर कहती रही मुझसे कि
मै अभी जिंदा हूँ

मुसीबतों मे जहा
हमराह अपना साया ना हुआ
वहाँ भी वो साथ चल दी
कदम था लड़खड़ाया हुआ
रब की तरह देती रही हरवक़्त साथ
और कहती रही रो मत
मै अभी ज़िंदा हूँ !!

                             
                                
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