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Wednesday, February 10, 2016

रो-रो कहतीं है ब्रज की सखियाँ

रो-रो कहतीं हैं ब्रज की सखियाँ (friends)
हाय श्याम-सुन्दर से लड़ गईं अखियाँ(eyes)
जाते समय ये कहा था मोहन ने
परसों मिलेंगें हम मधुवन में
पल-पल ना भूलू सुरतियाँ (face)
हाय श्याम सुन्दर से लड़ गई अखियाँ
रोतीं हैं अखियाँ मन घबरायें
पनघट पे कान्हा क्यों नहीं आयें
रो-रो मैं काटी सारी रतियाँ (night )
हाय श्याम-सुन्दर से लड़ गई अखियाँ
जब से गये मेरी खबर भी ना लियें
मैं लिख-लिख के भेज रही पत्रियाँ (letter)
हाय श्याम-सुन्दर से लड़ गई अखियाँ
बरस रही बरखा(rain)काले बादल छाये
पनघट पे कान्हा अबतक ना आये
कब से मैं भेज रही खबरियाँ (message)
हाय श्याम-सुन्दर से लड़ गई अखियाँ
रो-रो कहतीं हैं ब्रज की सखियाँ
हाय श्याम-सुन्दर से लड़ गई अँखियाँ !!