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Monday, September 12, 2016

लम्बोदरा विध्नहर्ता

                                   
लम्बोदरा विघ्नहर्ता
बुद्धि समृद्धि वैभव के दाता

प्रथम पूजा होती तेरी
हे गौरी पुत्र गणपति बप्पा

मूषक वाहन सिंदूर चढ़े माथा
बसो मनमंदिर मे शिव सुत

मोदक प्रिय एकदंता
सुखकर्ता हे दुखहर्ता

नारियल सुपारी पान चढ़ जाता
दूब तुम्हें अति है भाता

रिद्धी सिद्धी के तुम दाता
शुभ और लाभ मंगल गाता

जो भी तेरा ध्यान है ध्याता
दुख दरिद्रता निकट नही आता

करू विनती दोनो कर जोड़े देवा
भक्तन पर कृपा करो दिन राता

सकल मनोरथ पूर्ण हो जाता
तेरे नाम की जो मंगल गाता

लम्बोदरा विध्नहर्ता
बुद्धि समृधि वैभव के दाता