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Friday, September 16, 2016

तेरे दिल मे घर बना लेंगे

                            

करेंगे इतनी मुहब्बत की तुम्हें तुमसे चुरा लेंगे
इक बेअदब चाहत को अदब करना सीखा लेंगे

मिलेंगे खार राहों में तो हम उनसे निभा लेंगे
तुम्हारी बेवफाई भी गले अपने लगा लेंगे

ना चाहों तुम,तुम्हें हक़ है,ये दिल तुम्हारा है
मगर ख़ुद के लिए कोई सनम हम क्यूँ सज़ा लेंगे

कभी वो वक़्त आएगा जरूरत तुम्हे मेरी होगी
उसवक़्त के इतंजार मे हम पलके बिछा लेंगे

ये बातें साफ है हमदम मुहब्बत मे अहम् कैसा
ख़ुदी तुम करो वो भी सिर- माथे उठा लेंगे

अपनी मुस्कराहट पे किसी और को हक़ दो
तो आकर हम इन होंठों से तब्बसुम चुरा लेंगे

है चाहत मे इतनी ताकत कि खुदाई भी झुक जाये
तुम क्या चीज, तेरे दिल को ना अपना बना लेंगे

भरोसा है उस रब पे और अपनी मुहब्बत पे कि
वो दिन आएगा,तेरे दिल मे अपना घर बना लेंगे