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Sunday, March 6, 2016

गौरी की है बारत आई

गौरी की है बारात आई
सबने मिल के धूम मचाई
शिव  बसहा चढ़ आये
ना सोने का रथ लाये
सब लोगों ने बात फैलाई
सबने मिल के धूम मचाई
पाँच मुख था उनका
तीन नैन थे उनके
साँप ने फुफकार के
जीभ लपलपाई
सबने मिल के धूम मचाई
कोई अंधा आया
कोई लंगड़ा आया
भूत-बैताल ने भय फैलाई
सबने मिलके धूम मचाई
कोई इधर गिर रहा
कोई उधर गिर रहा
मैना रानी बहुत पछताईं
सबने मिल के धूम मचाई
बाघ का छाल पहने
न कोई वस्त्र न गहने
कैसा मुझको मिला है जमाई
सबने मिल के धूम मचाई
भोला नाचने लगे
डमरू बजने लगे
भस्म लगा के हुई रूसवाई
मैना रानी गिरी मुरछाई
गौरी जब देखी
सबकी हालत पढ़ ली
भोले से गुहार लगाई
प्रभू मेरी करो न रूसवाई
बाबा हँसने लगे
बहुत जँचने लगे
चारो तरफ हरियाली छाई
ऐसी अद्भुत शादी ना देखी भाई
शिव भोले ने माया रचाई
कितना सुन्दर मिला है जमाई
गौरी की है बारात आई
सबने मिल के धूम मचाई !!