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Thursday, April 14, 2016

मै गंगा हूँ,गंगा मैया

मै गंगा हूँ पवित्र पावनी निर्मल
मेरी धार्मिक मान्यताए भी है
और ऐतिहासिक भी
न जाने कितनी पौराणिक कहानियों पे
मेरा वर्चस्व है
भारत की संस्कृति मे मेरा जन्म कैसे भी हुआ हो
मगर इंसानो की पहली बस्ती मेरे
तट पर आबाद हुई
मै एक माँ भी हूँ गंगा मैया
सदियों से लोग मुझे माता कहते आ रहे हैं
क्योकि अपने पास आने वाले लोगों में
मै फ़र्क नही करती
सभी मेरे बच्चे हैं
मै बाँहे फैलाकर सबका स्वागत करती हूँ
अपने निर्मल जल से मैं
इंसानो का ही नही अपितु
जीव -जन्तु ,पशु- पक्षी  सभी का
पालन-पोषण करती हूँ
बगैर किसी आशा के
बगैर किसी चाहत के
मगर क्या मेरे निश्चल प्रेम को
तुम महसुस कर पाते हो
अपनी माँ के आँचल मे
मलमुत्र,गंदगी और ना जाने क्या -क्या
डालकर खुश होते हो
मै तुम्हे जीवन देती हूँ
और तुम मुझे तिरस्कार
मै तुम्हारे लिए समर्पित हूँ
और तुम असमर्पित
मेरा क्या
तुम मुझे खुद से जितना दूर करोगे
उससे कही ज्यादा दूर
मै तुमसे होती चली जाऊंगी
क्योकि मुझे सबकुछ बर्दाश्त है परंतु गंदगी नहीं
कितना फ़र्क है ना तुम्हारी और मेरी सोच में
सोचकर देखा है कभी
तुम्हारे प्रेम मे अभिमान है
और मेरे प्रेम मे त्याग
मत बर्बाद करो मुझे
तुम्हारे लिए ही कहती हूँ
मुझे मिटाकर तुम भी नही बच पाओगे
खुद से प्यार है तो मुझे रहने दो
स्वच्छ पावन निर्मल
तब कहो प्रेम से सब मिलकर हर हर गंगे !!