Search This Blog

Friday, June 10, 2016

बहकने लगे यूँ

उनके हर ख़त पे महकने लगे यूँ
वो आस-पास हो चहकने लगे यूँ
खुशबू फूलों की थी उस खत में या मुहब्बत की
शाखे  आर्जू  झुकने लगे यूँ
वो आस पास हो चहकने लगे यूँ

मुआमला दिल का था संजीदा
इधर भी उधर भी
तस्वीर दिल में थी उनकी इसकदर बसी हुई
उनके होंठों के जाम लब पे मेरे
छलकने लगे यूँ
वो आस-पास हो चहकने लगे यूँ

उनके अल्फाज़ सीपो में क़ैद मोतियों- सी
एक-एक शब्द प्यार की खुशबू से पिरोई हुई
गहरा ये राज़ एक पे एक खुलने लगे यूँ
वो आस-पास हो चहकने लगे यूँ

वो ख़त थी या प्यार भरी बेचैनियाँ थी
क़रार इधर भी नहीं था ना उधर भी
उनके ख़ामोश जज़्बात बहकने लगे यूँ
वो आसपास हो चहकने लगे यूँ

                                                      
शाखे आर्जू - इच्छारूपी वृक्ष की शाखा
संजीदा - गंभीर
क़रार - सुकून,चैन
जज़्बात - विचार,खयालात,भावना


मेरा ब्लॉग ज्वाइन करने के लिए ऊपर सिनरी के नीचे join this site  पर क्लीक करे